भारत में बाल स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के संकेत, NFHS-6 ने दिखाई सकारात्मक तस्वीर
नई दिल्ली | हेल्थ डेस्क
भारत में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर National Family Health Survey-6 (NFHS-6) से सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले सर्वेक्षण की तुलना में बच्चों के टीकाकरण, पोषण और शुरुआती बाल देखभाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों में सुधार हुआ है।
NFHS-6 का सर्वेक्षण 2023-24 में किया गया था और इसमें करीब 6.79 लाख परिवारों तथा देश के 715 जिलों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण का संचालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत International Institute for Population Sciences (IIPS) ने किया।
टीकाकरण कवरेज में बढ़ोतरी
बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज में वृद्धि शामिल है।
NFHS-5 में 12–23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8% था, जो NFHS-6 में बढ़कर 87.1% हो गया।
वहीं, इस आयु वर्ग के 96% से अधिक बच्चों को कम से कम एक वैक्सीन मिली है। सरकार के अनुसार, बच्चों को अधिकांश टीके सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से मिले।
रोटावायरस वैक्सीन में बड़ा सुधार
सर्वेक्षण में रोटावायरस वैक्सीन की कवरेज में भी उल्लेखनीय वृद्धि सामने आई है। यह कवरेज 36.4% से बढ़कर 85.6% हो गई। रोटावायरस संक्रमण छोटे बच्चों में गंभीर दस्त का कारण बन सकता है, इसलिए इस टीकाकरण में वृद्धि को बाल स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बच्चों में Stunting में कमी
बाल पोषण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है।
5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में stunting यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या NFHS-5 में 35.5% थी, जो NFHS-6 में घटकर 29.3% रह गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार stunting में लगभग 17% की कमी दर्ज की गई है।
Stunting लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने या बार-बार होने वाले संक्रमण सहित कई कारणों से जुड़ी हो सकती है। बचपन में लगातार पोषण और स्वास्थ्य देखभाल इस समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Severe Wasting में भी गिरावट
Severe wasting यानी बच्चे की लंबाई के अनुपात में अत्यधिक कम वजन भी बाल कुपोषण का गंभीर संकेत माना जाता है।
NFHS-5 में severe wasting 7.7% थी, जो NFHS-6 में घटकर 5.2% हो गई। यानी इसमें लगभग 32% की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि बच्चों में underweight की दर में सुधार अपेक्षाकृत मामूली रहा—यह 32.1% से घटकर 31.8% हुई। इससे संकेत मिलता है कि कुपोषण के खिलाफ प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है।
जन्म के तुरंत बाद स्तनपान में सुधार
शिशु के स्वास्थ्य के लिए जन्म के बाद जल्द स्तनपान शुरू करना महत्वपूर्ण माना जाता है। NFHS-6 में जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने वाली माताओं का अनुपात 41.8% से बढ़कर 50.1% हुआ है।
यह बदलाव नवजात बच्चों को शुरुआती पोषण और मां के दूध से मिलने वाली सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
छह महीने के बाद पूरक आहार में भी बढ़ोतरी
6–8 महीने के बच्चों में मां के दूध के साथ पूरक आहार देने की दर भी बढ़ी है। यह आंकड़ा 45.9% से बढ़कर 59.5% हुआ।
छह महीने के बाद बच्चे की बढ़ती पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उम्र के अनुसार सुरक्षित और पौष्टिक complementary foods देना जरूरी होता है।
बच्चों के स्वास्थ्य में व्यापक सुधार
NFHS-6 में केवल पोषण और टीकाकरण ही नहीं, बल्कि मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार दर्ज किया गया है।
सरकार के अनुसार, संस्थागत प्रसव की हिस्सेदारी 90.6% तक पहुंच गई। गर्भवती महिलाओं में कम से कम चार ANC विजिट का अनुपात भी बढ़ा है। ये सेवाएं नवजात और मातृ स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अभी भी कई चुनौतियां मौजूद
हालांकि NFHS-6 के आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए यह आगे की चुनौती भी दिखाते हैं। देश में अभी भी लाखों बच्चों को पर्याप्त पोषण, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और समय पर टीकाकरण की जरूरत है।
विशेष रूप से underweight, stunting और wasting को और कम करना, सभी बच्चों तक पूर्ण टीकाकरण पहुंचाना और शुरुआती वर्षों में बेहतर पोषण उपलब्ध कराना लगातार प्राथमिकता बना रहेगा।
माता-पिता के लिए जरूरी संदेश
बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
बच्चे का टीकाकरण समय पर करवाएं।
जन्म के बाद जल्द से जल्द स्तनपान शुरू करने की कोशिश करें।
पहले छह महीने शिशु के लिए मां के दूध को प्राथमिकता दें।
छह महीने के बाद उम्र के अनुसार पौष्टिक पूरक आहार शुरू करें।
बच्चों के भोजन में दालें, फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
बच्चे के वजन और लंबाई की नियमित निगरानी कराएं।
बार-बार बीमार पड़ने, वजन न बढ़ने या विकास में देरी होने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
निष्कर्ष
NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने बाल टीकाकरण और कुपोषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्ण टीकाकरण में वृद्धि, रोटावायरस वैक्सीन की बेहतर पहुंच, stunting और severe wasting में कमी तथा शुरुआती स्तनपान और पूरक आहार में सुधार बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
फिर भी लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार तक सीमित नहीं होना चाहिए। हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, पर्याप्त पोषण और समय पर टीकाकरण पहुंचाना जरूरी है, ताकि भारत की अगली पीढ़ी स्वस्थ और मजबूत बन सके।
स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार; NFHS-6 (2025-26).
